
desk. सनातन धर्म के लोगों के लिए जूलियन कैलेंडर की तरह हिंदू कैलेंडर का भी खास महत्व है। पंचांग को हिंदू कैलेंडर का ही हिस्सा माना जाता है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण यानी पांच अंगों के जोड़ से बनता है। इनसे किसी भी दिन की तिथि, शुभ समय, अशुभ समय और काल आदि के बारे में पता चलता है। खासकर शुभ मुहूर्त निर्धारित करने के लिए पंचांग का इस्तेमाल होता है।
समर्पित: सूर्य देव (रविवार)
दिशा शूल: पश्चिम
द्रिक पंचांग के अनुसार, 03 अगस्त 2025 को सुबह 09:42 मिनट तक श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रहेगी, जिसके उपरांत दशमी तिथि का आरंभ हो रहा है। रविवार को सुबह 06:24 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा, जिसके उपरांत ब्रह्म योग बन रहा है। नक्षत्र की बात करें तो सुबह 06:35 मिनट तक विशाखा है, जिसके बाद अनुराधा का आरंभ होगा। जबकि सुबह 09:42 मिनट तक कौलव करण रहेगा, जिसके उपरांत देर रात 10:45 मिनट तक तैतिल करण रहेगा और फिर अंत में गर करण का संयोग बन रहा है।
सम्वत और चंद्र मास
आज 03 अगस्त 2025 को 2081 नल गुजराती सम्वत है। जबकि 1947 विश्वावसु शक सम्वत और 2082 कालयुक्त विक्रम सम्वत है। इसके अलावा चंद्र मास यानी पूर्णिमान्त और अमान्त श्रावण है।
सूर्योदय से लेकर चंद्रास्त तक
आज प्रात: काल 05 बजकर 44 मिनट पर सूर्योदय और शाम में 07 बजकर 11 मिनट पर सूर्यास्त होगा। जबकि दोपहर में 02 बजकर 25 मिनट पर चंद्रोदय होगा। बता दें कि 03 अगस्त को चंद्रास्त नहीं होगा। दरअसल, 04 अगस्त 2025 को प्रात: काल 12 बजकर 43 मिनट पर चंद्रास्त होने की संभावना है।
नवग्रहों की स्थिति
आज 03 अगस्त 2025, वार रविवार को कर्क राशि में सूर्य और बुध ग्रह रहेंगे। जबकि चंद्र देव वृश्चिक राशि में रहेंगे। इसके अलावा कन्या राशि में मंगल ग्रह, मीन राशि में शनि देव, कुंभ राशि में राहु ग्रह और सिंह राशि में केतु ग्रह मौजूद रहंगे। वहीं, शुक्र और गुरु की बात करें तो वो मिथुन राशि में ही रहेंगे।
