एमपी : 10 साल से खुले में पड़ा लाखों क्विटंल अनाज सड़ रहा

रीवा. एक तरफ जहां गरीब परिवार अनाज के दाने-दाने के लिए मोहताज हैं. वहीं रीवा (Reva) में प्रशासनिक लापरवाही (Administrative negligence) और भ्रष्टाचार की (Corruption) भेंट चढ़ा लाखों क्विंटल अनाज (grains) खुले में पड़े-पड़े खराब हो गया. आवारा मवेशी भी इस अनाज को नहीं खा रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि सड़े अनाज की दुर्गंध से 5 KM एरिया के रहवासी काफी परेशान हैं. उन्हें महामारी का डर सताने लगा है. हैरत कि बात यह है कि भ्रष्टाचार की जांच में लाखों क्विंटल अनाज देखते देखते सड़ गया. अब जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं.

यह पूरा मामला रीवा जिले के सिरमौर उमरी गांव का है. जहां किसान समृद्धि केंद्र और मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के बगल में 2014 से अनाज खुले में पड़े-पड़े सड़ रहा है. बताया जाता है कि हजारों क्विंटल अनाज का यहां खुले में ही भंडारण किया गया था. भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद अनाज उसी हालत में पड़ा रह गया. आज हालत यह है कि पूरा अनाज सड़ का बिखर गया है. जानवरों के खाने योग्य भी नहीं बचा.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस सड़े हुए अनाज से 4 से 5 किलोमीटर तक का इलाका प्रभावित है. लोगों का आरोप है कि इस गंदगी से हैजा जैसी बीमारियां फैल रही हैं. जिससे इंसान और जानवर दोनों बीमार हो रहे हैं. एक तरफ सरकार किसानों को उपज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है, तो दूसरी तरफ भंडारण के इंतजाम न होने से लाखों क्विंटल अनाज खराब हो जाता है.

इस मामले पर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि यह स्टॉक 2019 में ही हटा दिया जाना था. यह एक गबन का मामला है. जिसकी मार्कफेड में जांच चल रही है. यह किसकी लापरवाही से हुआ है. इसकी जांच की जाएगी और आगे कठोर कार्रवाई की जाएगी. कलेक्टर ने तुरंत मार्कफेड को इस सड़े हुए अनाज का डिस्पोज करने का आदेश दिया है. ताकि लोगों को इस परेशानी से जल्द से जल्द निजात मिल सके.

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