आगे चल रहा था स्कूल, पीछे हो रहा था देह व्यापार!

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने मानवता और शिक्षा व्यवस्था, दोनों को शर्मसार कर दिया है। शहर के पॉश इलाके कैंट क्षेत्र के किशन नगर एक्सटेंशन स्थित एक प्रतिष्ठित प्लेग्रुप स्कूल के परिसर में चल रहे देह व्यापार का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। स्थानीय निवासियों और एक हिंदू संगठन की तत्परता के बाद हुई इस छापेमारी ने राजधानी में हड़कंप मचा दिया है।

पुलिस द्वारा रेस्क्यू की गई तीन युवतियों की आपबीती किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कंपा देने वाली है। ये युवतियां उत्तर प्रदेश (मेरठ), हरियाणा (फरीदाबाद) और मेघालय की रहने वाली हैं। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इन युवतियों को अच्छी कंपनी में नौकरी दिलाने का लालच देकर देहरादून बुलाया था।

यहां पहुंचने के बाद उनके साथ न केवल जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए, बल्कि चोरी-छिपे उनके अश्लील वीडियो भी शूट कर लिए गए। बाद में इन्हीं वीडियो को सार्वजनिक करने और जान से मारने की धमकी देकर उन्हें देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया गया। मेघालय की युवती के मामले में तो क्रूरता की हदें पार हो गईं। उसे उसके अपने प्रेमी ने ही चंद रुपयों और शराब के लालच में दलालों के हवाले कर दिया था।

स्कूल की आड़ में रची गई साजिश

आरोपियों ने इस घिनौने कृत्य के लिए प्लेग्रुप स्कूल के पिछले हिस्से को अपना ठिकाना बनाया था। उनका मानना था कि स्कूल की आड़ में संदिग्ध गतिविधियों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। दिनभर बच्चों के शोर-शराबे के बीच यह गिरोह अपने ‘ग्राहकों’ को बुलाता था। छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से शराब की बोतलें और गांजा, भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री और युवतियों की ‘रेट लिस्ट’ वाली एक डायरी बरामद हुई है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बचाई गई युवतियों में से एक के गंभीर रूप से संक्रमित (एचआईवी संदिग्ध) होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे इस पूरे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

पुलिस कार्रवाई और फरार मास्टरमाइंड

पुलिस ने मौके से दो संचालकों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान आशीष कुमार पांडे और जंग बहादुर (दोनों निवासी जयपुर, राजस्थान) के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी आशीष पांडे का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है और वह पहले भी इसी तरह के मामलों में जेल जा चुका है।

जांच के मुख्य बिंदु

मकान मालिक ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के आरोपियों को कमरा किराए पर दिया था, जिस पर पुलिस सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष ललित शर्मा का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी महज प्यादे हैं, जबकि इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कोई और है जो फिलहाल फरार है।

पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या स्कूल प्रबंधन को इस अनैतिक कार्य की भनक थी या उनकी भी इसमें कोई संलिप्तता है। फिलहाल, पुलिस ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (PITA) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। देवभूमि में इस तरह की घटना ने बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के सत्यापन और रिहायशी इलाकों में चल रहे स्कूलों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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