क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’? महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने क्यों थाम लिया इसका हाथ

सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से हर तरह सिर्फ कॉकरोचों की बाते हो रही हैं, अगर आप सोच रहे हैं कि यह किसी बड़ी बीमारी या कोई इनकी संख्या को लेकर है या किसी तरह की मीम तो आप एकदम गलत है. दरअसल, भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने एक बयान दिया, जिसके बाद से हर तरफ उनकी इस बयान का विरोध शुरू हो गया. मामला इतना आगे बढ़ गया कि अब एक पार्टी भी वजूद में आ गई है, जिसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पार्टी को देश के जाने माने सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने जॉइन करने की बात सामने आ रही है.

आखिर क्यों हर तरफ हो रही है कॉकरोच की बात?

दरअसल देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बीते शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से की थी. उन्होंने कहा था कि बेरोजगार युवा आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर व्यवस्था पर हमला शुरू कर देते हैं. उनके इस बयान के बाद ही सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ चर्चा में आ गई. हालांकि, यह कोई वास्तविक राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही चुनावी राजनीति से इसका कोई संबंध है. दरअसल, यह एक पैरोडी अकाउंट है, जो तेजी से युवाओं के बीच वायरल हो रहा है. यह अकाउंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम दोनों पर मौजूद है और बड़ी संख्या में लोग ज्वॉइन कर रहे हैं. महज 24 घंटे के भीतर इसके 15 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए, जबकि 40 हजार से ज्यादा लोग सदस्य बनने का दावा कर चुके हैं. पार्टी की बायो में लिखा गया है कि यह ‘बेरोजगारों की आवाज उठाने’ का काम करेगी. ऐसा भी माना जा रहा है कि इस पार्टी को देश के जाने माने सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने ज्वॉइन किया है.

विवाद बढ़ने पर CJI सूर्यकांत ने दी सफाई

इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में विवाद बढ़ गया. कई लोगों का कहना था कि देश के मुख्य न्यायाधीश को युवाओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था. बढ़ते विवाद के बीच Justice Surya Kant ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि मीडिया में आई कुछ खबरों से उन्हें ‘दुख’ हुआ, क्योंकि उनमें यह दिखाया गया कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की है. उन्होंने बयान जारी कर कहा, ‘मुझे यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने हल्के-फुल्के अंदाज में की गई मेरी मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया’.

उन्होंने आगे कहा कि उनकी टिप्पणी युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के संदर्भ में थी जो ‘फर्जी और नकली डिग्रियों’ के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. CJI ने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकालकर पेश किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई है.

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